Vyanjan Sandhi Ke Niyam : व्यंजन संधि के नियम,उदाहरण

हमारे व्हाट्सएप चैनल से जुड़े अभी जुड़े
हमारे टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े अभी जुड़े

Vyanjan Sandhi Ke Niyam-वह ध्वनि विकार (परिवर्तन) जो परस्पर दो वर्ग के (स्वर+व्यंजन, व्यंजन+स्वर, व्यंजन+व्यंजन) मेल से उत्पन्न होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं।

किसी वर्ग अर्थात् क,च,ट,त,प के प्रथम वर्ग के बाद यदि कोई स्वर या वर्ग का तीसरा, चौथा सघोष व्यंजन (ड् ,ञ ,ण ,न,म) को छोड़कर अथवा य,र,ल,व, ह में से कोई वर्ण आये तो पहला वर्ण उसी वर्ग का तीसरा वर्ण(ग,ज,ड,द,ब) हो जाता है।

Vyanjan Sandhi Ke Niyam: व्यंजन संधि के उदाहरण

  • दिक्+अंत = दिगंत
  • दृक्+अंचल = दृगंचल
  • वाक्+दान = वाग्दान
  • वाक्+जाल = वाग्जाल
  • वाक्+निपुण = वाड्निपुण
  • वाक्+मय = वाड्मय
  • षट्+मास = षण्मास
  • जगत्+ नाथ = जगन्नाथ
  • अप+मय = अम्मय
  • सम्+कल्प = संकल्प
  • सम्+चार = संचार
  • सम्+तोष = संतोष
  • सम्+पूर्ण = सम्पूर्ण
  • सम्+योग = संयोग
  • सम्+योजना = संयोजना
  • सम्+विधान = संविधान
  • सम्+रचना = संरचना
  • तद्+काल = तत्काल
  • उद्+कृष्ट = उत्कृष्ट
  • उद्+कट = उत्कट
  • संसद् + सदस्य = संसत्सदस्य
  • उत्+छेद उच्छेद
  • उत्+चारण = उच्चारण
  • उत्+छिन्न = उच्छिन्न
  • वृहत्+चयन = वृहच्चयन
  • उत्+ज्वल = उज्ज्वल
  • सत्+जन = सज्जन
  • जगत्+जीवन = जगज्जीवन
  • यावत्+ जीवन = यावज्जीवन

आशा करते हैं कि आपको इस ब्लॉग से आपको व्यंजन संधि के नियम,उदाहरण (Vyanjan Sandhi Ke Niyam) बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई होगी संधि से जुड़े हुए अन्य महत्वपूर्ण और रोचक ब्लॉग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

इसके साथ आप हमारे अन्य ब्लॉग को पढ़ सकते है जिसकी लिंक निचे दी गई है।

वृद्धि संधि के उदाहरण : (Vriddhi sandhi ke udaharan) व नियम

संस्कृत में वर्ण प्रकार- संस्कृत व्याकरण नोट्स

आप अन्य सामान्य ज्ञान के लिए आप फैक्ट्स पत्रिका पर जा सकते है।

Leave a Comment